बगैर परीक्षा ही पदोन्नत कर दिए जाएं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र: शिक्षक संघ

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र बगैर परीक्षा ही पदोन्नत कर दिए जाएं


लॉकडाउन की वजह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक की वार्षिक परीक्षाएं बाधित हैं। परास्नातक की सेमेस्टर परीक्षाएं तो शुरू ही नहीं हो सकीं। यह परीक्षा 13 अप्रैल से 26 मई तक प्रस्तावित थीं। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद स्नातक और परास्नातक की परीक्षाएं करवाकर परिणाम घोषित करने में काफी वक्त लग जाएगा। सत्र अनियमित होने का खतरा भी उत्पन्न होने लगा है।

इसलिए इविवि शिक्षक संघ (आटा) के अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखकर छात्रों को बगैर परीक्षा पदोन्नत करने के सुझाव दिए हैं। वरिष्ठ प्रोफेसरों से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने सुझाव दिया है कि सभी संकायों के स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को द्वितीय वर्ष और द्वितीय वर्ष के छात्रों को तृतीय वर्ष की कक्षाओं में बिना परीक्षा लिए प्रोन्नत करने और पूर्व की कक्षा में मिले अंकों के आधार पर परीक्षाफल प्रदान करने पर विचार किया जाए। इसी तरह परास्नातक के छात्रों के सेमेस्टर परीक्षा के प्राप्तांकों को आधार मानते हुए उनके परीक्षाफलों का निर्धारण करने पर विचार किया जाए।

प्रो. दुबे ने पत्र में लिखा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में भी इसी प्रकार का निर्णय लिए जाने का उपक्रम चल रहा है। बकौल प्रो. दुबे यह इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने में शिक्षकों को भयानक अनुभूतियां हो सकती हैं, जिसके कारण परीक्षाफल और अधिक विलंबित हो सकता है। जिससे अगला सत्र आरंभ करने में कम से छह माह का विलंब हो सकता है।

मेरिट के आधार पर लिया जाए प्रवेश
इविवि के प्रवेश प्रकोष्ठ ने पिछले माह प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू किया था पर छात्रों के विरोध के कारण उसे अपने कदम पीछे करने पड़े थे। प्रो. दुबे ने इविवि के सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा भी न कराने पर विचार करने को कहा है। उनका सुझाव है कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर प्रवेश दिए जाएं।

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